उपन्यास(भारत/india)
- भादों का महीना था, पूरे शहर में………………….पेज १-२
- “भगवान के घर देर है अंधेर नहीं ” |……………..पेज ३-४
- भगवान तुझे कभी माफ नहीं करेगा |…………….पेज ५-६
- “हमारा बच्चा “-रोती हुई रूबिया ने कहा|……….पेज ७-८
- चढ्ढा साहब सिगरेट सुलगाये पलंग………………पेज ९-१०
- सुखिया किचन के बहार जमीन ………………….पेज ११-१२