समारोह के चित्र देखकर मन प्रसन्न हो गया। समारोह ऐसा लगता है कि हिन्दी भवन दिलली में संपन्न हुआ था। पर दिल्ली में रहकर भी सूचना न मिलने और न पहुंच पाने के लिए दुख है। पर श्री विजय राज चौहान के साहित्य भविष्य के प्रति आशान्वित हूं। शुभ वर्तमान।
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July 31, 2008 at 8:17 pm |
समारोह के चित्र देखकर मन प्रसन्न हो गया। समारोह ऐसा लगता है कि हिन्दी भवन दिलली में संपन्न हुआ था। पर दिल्ली में रहकर भी सूचना न मिलने और न पहुंच पाने के लिए दुख है। पर श्री विजय राज चौहान के साहित्य भविष्य के प्रति आशान्वित हूं। शुभ वर्तमान।