उसने अपनी आँखों के सामने दो खून होते हुए देखे थे |

INDIA

दीनू का घुटना दीवार से टकरा जाता है और उससे खून बहने लगता है | दीनू जमीन पर हाथ रखकर खड़ा होता है | उसका घुटना काफी दर्द कर रहा था कि अचानक कुछ सोच कर उसके दिल कि धड़कन तेज हो जाती है | वह साँस रोककर कुछ सुनने का प्रयास करता है लेकिन उसे कुछ सुने नही देता , वह बैलगाड़ी कि तरफ़ तेजी से लंगडाते हुए दौड़ता है | उसका दिल बैठा जा रहा था | वह बग़ीचे में लगी झाडियो में उलझ कर दो तीन जगह गिरता भी है परन्तु फिर उठा कर दौड़ने लगता है इस समय उसका गला सुखा जा रहा था | वह दौड़कर गाड़ी पर चढ़ जाता है और फुलवा को हिलाते हुए आवाज लगता है लेकिन फुलवा कुछ नहीं बोलती, वह इस संसार से जा चुकी थी उसकी आँखें पत्थरा गई थी दीनू जोर-जोर से फुलवा को हिलता है और चिल्लाता है -”फुलवा ……आ……….आ…….|” दीनू कि आवाज आकाश को चीर गई थी |

दीनू फुलवा के शरीर से लिपट कर रोने लगता है -”नहीं फुलवा, नहीं तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकती, मुझे भी अपने साथ क्यों ना ले चली, क्यों इस अंधे जहान में ठोकरे खाने को छोड़ दिया |”

दीनू का रोते हुए बुरा हाल हुआ जा रहा था, इस समय उसके घुटने का खून उसकी धोती को भी गिला कर गया था | हरिया निचे बैठा अपनी गरीबी को कोष रहा था तो पारो फुलवा के पैरो कि तरफ़ बैठी रो रही थी | उसने अपनी आँखों के सामने दो खून होते हुए देखे थे |वह भी अपने भाग्य को कोष रही थी | हरिया उठता है और दीनू के सिर पर सांत्वना का हाथ रखता है |

देखो ना हरिया फुलवा कुछ नही बोलती “- दीनू ने अपनी बिकती आवाज हरिया से कहा |

हरिया दीनू को उठा कर गले से लगा लेता है , बोला -”फुलवा कुछ नहीं बोलेगी दीनू , हमारी गरीबी ने उसे खा लिया |”

कहते – कहते हरिया का गला भी रूंध जाता है उसकी आँखों से भी आंसुओ कि धार निकलकर नीचे बह जाती है |

हरिया नीचे उतर कर बैलगाड़ी जोतता है और और गाँव कि तरफ़ चल देता है | पारो चारपाई पर फुलवा के पास बैठी थी तो दीनू बैलगाड़ी के एक कोने में नीचे सिर गडाये बैठा था |

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