गाँव के आवारा कुत्ते भी ठण्ड से बचने के लिए कही जा छुपे थे |

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पूस महीने की कड़के की ठण्ड पड़ रही थी | गेहूँ जमकर काफी बड़े हो गए थे, उनमें अब कोर लगने का समय आ गया था | नहर में पानी आ रहा था, इसलिए लोग अपने गेहूँ में पानी लगा रहे |

आज रात हरिया का भी पानी लगने का नंबर था | रात के बारह बजे से सुबह के तीन बजे तक हरिया के पानी का समय था, इसलिए हरिया काफी दिन से ही पानी पर जाने की तैयारी कर रहा था | वह लालटेन में तेल डालता है और उसकी चिमनी पानी से धो कर साफ़ करता है, दो फावड़े बहार रखता है एक उपला और लाठी भी रखता है |

शाम हो गयी थी, पारो खाना पकाने लगती है, दीनू बेलों और गायें को चारा डालता है | हरिया बैठा हुक्का पी रहा था, छोटा बालक भारत भी पारो के पास बैठा खाना खा रहा था |

पारो खाना बनाकर खाना परोस देती है तो हरिया और दीनू भी खाना खा लेते है | इसके बाद दीनू चिलम उठाकर उसे भरता है और हुक्के में पानी डालता है |

रात के लगभग नो बज गाये थे दीनू और हरिया बैठे हुक्का पी रहे थे, दीनू हुक्का पीकर लेट जाता है उसे नींद लग गयी थी | हरिया बैठा हुक्का पी रहा था | कुछ देर बाद वह बहार निकल कर आसमान की तरफ तारों की दिशा देखता है | लगभग साढ़े दस या ग्यारह का समय हुआ होगा, वह अन्दर जाता है और दीनू को खेत चलने के लिए जागता है | दोनों अपनी-अपनी चद्दर ओढ़कर खेत की तरफ चल देते है |हरिया लालटेन हाथ में लिए और कंधे पर फावडा लिये आगे चलता है तो एक हाथ में उपला लाठी लिए और कंधे पर फावड़ा लिये दीनू उसके पीछे चलता है |

गली यों में सन्नाटा छाया हुआ था, ठंडी हवा चल रही थी | गाँव के आवारा कुत्ते भी ठण्ड से बचने के लिए कही जा छुपे थे | टेढी- मेढ़ी खेत की पग डँड़ियों से होते हुए वों दोनों खेत पहुंच जाते है | हरिया नाली पर पंहुचता है, पानी पड़ोस के खेत में चल रहा था और वह पीछे नाली को नहर तक देखने गया था | हरिया वापस आ जाता है | वह जेब से माचिस निकल कर ईख की पत्ती से उपले में आग लगा ता है तो दीनू ईख के झुंड में रखे हुक्के को उठा लाता है | कुछ देर बाद उपले जल कर आग हो जाती है तो दीनू चिलम भर देता है और वे दोनों हुक्का पीने लगते है |

दोनों मित्र बैठे हुक्का पी रहे थे तो कुछ देर बाद लालटेन की धुंध ली रोशनी में दूर नाली पर उन्हें कोई व्यक्ति दिखाई देता है जो उन्हीं की तरफ आ रहा था | वह खेत का पड़ोसी गणेशी था जो नाली पर चक्कर लगा कर आया था |

<<पीछे उपन्यास (भारत /India) से-(लेखक-विजय-राज चौहान)

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